नोहर टायर फैक्ट्री में आग। Fire in Tyre Factory.

 नोहर दादा फैक्ट्री में आग।


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"ये तो मालिक का हुक्म है, उसकी रज़ा है हम उसकी रज़ा में राज़ी है" ये लफ्ज़ है इस फैक्ट्री के मालिक के।

राजस्थान प्रांत के हनुमानगढ़ जिले के एक शहर नोहर के अंदर टायर फैक्ट्री में आग लगने की वजह से वहां पर आग का तांडव देखने को मिला। आग लगने की वजह से चारों ओर वातावरण एकदम धुआं–धुआं हो गया।


इतनी भयंकर आग के तांडव को देखते हुए वहां पर अफरा तफरी मच गई और डर का माहौल बन गया।


आग से उठने वाले धुएं और लपटों ने चारों ओर के माहौल को अपने कब्जे में ले लिया जिसकी वजह से वहां पर काले धुएं का गुब्बार बन गया।


आग इतनी भयंकर लगी थी कि जिससे कई किलोमीटर की दूरी पर से ही आग को और उससे उठने वाले धुएं को साफ-साफ देखा जा सकता है


आग लगने की वजह से फैक्ट्री में रखी हुई मशीन और जो पड़े टायर पड़े थे वे भी आग की चपेट में आ गए।


# कब लगी

यह आग "गुरुवार" को लगी थी कोई कुछ भी समझ पाता उससे पहले ही आग ने भीषण रूप ग्रहण कर लिया।


लेकिन खबर मिलने पर ही फायर ब्रिगेड और आसपास के लोगों ने भी आग बुझाने में सहायता की लेकिन फिर भी आग इतनी भीषण थी कि उस पर काबू पाना इतना आसान नहीं था।

लेकिन फिर भी 5 घंटे की मशक्कत के बाद आग पर काबू पा लिया गया।


# क्या था कारण आग लगने का —


अभी तक कुछ साफ-साफ पता नहीं लग पाया है की फैक्ट्री में आग लगने की वजह क्या थी, क्या कारण था।


# क्या कहा फैक्ट्री के मालिक ने—


फैक्ट्री के मालिक ने अपना धैर्य और साहस दिखाते हुए जवाब दिया की–

“ये तो मालिक का हुक्म है उसकी रज़ा है और हम उसकी रज़ा में राज़ी हैं। हालांकि 50 लोगों का स्टाफ था किसी भी जान का नुकसान नहीं हुआ। ये तो कुदरत का फैसला था हम उसके फैसले पर राजी हैं।”

अपने बेटों को कहते हुए पाए गए कि "घर चलो पैसा तो और कमा लेंगे।" उनके मुख से निकली हुई है ये बातें दर्शाती हैं कि उनके अंदर ईमान और साहस कितना भरा हुआ है।


# नुकसान

अनुमान है कि 6 से 7 करोड़ रुपए के बीच का नुकसान हो गया हालांकि किसी भी जान का नुकसान नहीं हुआ किसी भी इंसान को कोई खरोच तक नहीं आई।


# हर कौम ने की मदद—


बताया जा रहा है की फैक्ट्री के मालिक नोहर के एक अच्छे समाजसेवी है जिसकी वजह से हर कौम के साथ इनका प्रेम भाव है और उनके इस दुख के घड़ी में हर कौम ने उनकी भरपूर मदद की है। नोहर के आम नागरिकों ने बढ़ती हुई आग के बीच से बचे हुए टायरों को एक तरफ हटाने और बचाने का कार्य किया।


# प्रशासन की कमी बताई गई—


नोहर के आम नागरिकों का कहना है कि जो दमकल हैं वह दो से ढाई घंटे लेट आए हैं जिस वजह से यह नुकसान बढ़ता ही गया अगर यह दमकालीन और ऐसी व्यवस्थाएं नोहर शहर के अंदर होती तो शायद इस घटना पर काबू जल्दी ही पाया जा सकता था।


इसी के साथ इस दुखद घटना की बातों को हम यहीं पर खत्म करते हैं इसके बारे में और जानकारी हम आपको आगे अलग ब्लॉग में देंगे। जैसे इस घटना के कारणों का पता चलता है हम आपको जरूर जरूर सूचित करेंगे।


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